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पुरुषों द्वारा की जा रहीं आत्महत्याओं पर होगा मंथन

पुरुषों द्वारा की जा रहीं आत्महत्याओं पर होगा मंथन

पुरुषों के अधिकारों के लिए काम करने वाली Confidare India नाम की संस्था पुरुषों के मानसिक स्वास्थ एवं कानूनी मुद्दों पर दो दिवसीय अकादमिक सम्मलेन आयोजित करने जा रही है। यह सम्मेलन बैंगलोर में 10 व 11 जून को सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक ‘द पॉल, बैंगलोर’, डोमलूर, एम्बेसी गोल्फ़ लिंक्स टेक पार्क के सामने, इंटरमीडिएट रिंग रोड, में होगा।

इस सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षाविदों, कानूनी दिग्गजों, मनोवैज्ञानिकों, समाजशास्त्रियों, कंपनियों, मानव संसाधन व इएपी (EAP) कर्मचारी सहायक प्रोफेशनल इत्यादि को एक ऐसा मंच उपलब्ध करना है जहां पुरुषों की समस्याओं के बारे में बात की जा सके और पुरुष समाज की समस्याओं का संस्थागत समाधान खोजा जा सके।

संस्था के प्रवक्ता की मानें तो अकेले 2014 में भारत में आत्महत्या करने वालों में 67.7 प्रतिशत पुरुष की थे और कर्नाटक में करीब 7500 पुरुषों ने ख़ुदकुशी की जबकि पूरे राज्य में 10945 आत्महत्याएं रिकॉर्ड की गईं। यह तथ्य राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) जो गृह मंत्रालय की एक इकाई है के आकड़ों से सामने आया है।

वैवाहिक समस्याएं और अन्य पारिवारिक समस्याओं व अस्वस्थता 44.8 प्रतिशत आत्महत्याओं की वजह बनी। इस बारे में संस्था की प्रवक्ता ज्योति तिवारी ने बताया, “ये तीन बिंदू आपस में मिल कर आत्महत्या के पीछे सबसे बड़े कारण बनते हैं लेकिन इस विषय पर न के बराबर शोध किया गया है कि आखिर क्यों इतनी बड़ी संख्या में लोग और खासकर पुरुष, शादी, पारिवारिक समस्याओं या स्वस्थ्य की वजह से अपना जीवन समाप्त करने का कदम उठा रहे हैं।”

वह आगे बताती हैं, “अगर हम कर्नाटक और भारत के आकड़ों को देखे तो वो 4903 और 58986 क्रमशः होते हैं अर्थात अकेले 2014 में करीबन 5000 पुरुषों ने कर्नाटक में और 59000 पुरुषों ने पूर्ण भारत में शादी व पारिवारिक समस्याओं या अस्वस्थता के कारण अपना जीवन समाप्त कर लिया। हमारी बातचीत सिर्फ इस बात के इर्द-गिर्द घूमती रहती है कि महिलाएं इन सब से कैसे प्रभावित होती हैं लेकिन पुरुषों की बात आती है तो हम आखं मूंद लेते हैं।”

इस सम्मेलन में अनेक वक्ता जोकि विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से हैं वे विविध विषयों और नई जानकारियों के साथ अपने विचार व्यक्त करेंगे। इन विषयों में कॉर्पोरेट जगत में पुरुषों का स्वास्थ्य, वैवाहिक तथा पारिवारिक समस्याएं, अतरंगी संगी हिंसा, मुकदमों का पुरुषों के स्वास्थ्य पर असर, पारिवारिक विवाद में आपातकालीन स्थितियां आदि शामिल रहेंगे।

संस्था के सह-संस्थापक अनिल कुमार ने इस बारे मे बताया, “अगर पुरुष अपनी समस्याओं को समय पर खुल के बताएं और उन समस्याओं को अंतिम समय तक न टालने हेतु सक्षम बनें तो काफी क्षति को रोका जा सकता है।”